Tuesday 3rd of November 2026

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कोरबा : छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर जितेंद्र सारथी ने प्रदेशवासियों को दी बधाई, कहा– हमारी संस्कृति, परंपरा और प्राकृतिक धरो

कोरबा (दैनिक न्यूज उड़ान) छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के पावन अवसर पर जितेंद्र सारथी ने प्रदेश के सभी जिलों के नागरिकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं, उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल एक राज्य नहीं, बल्कि विविध संस्कृतियों, लोक परंपराओं, प्राकृतिक संपदाओं, जनजातीय विरासत और आपसी भाईचारे की एक अनूठी पहचान है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान इसके 33 जिलों की अपनी-अपनी विशेषताओं, बोली, खानपान, रहन-सहन और लोक संस्कारों में बसती है, उत्तर में सरगुजा संभाग की जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता, मध्य छत्तीसगढ़ की लोककला, लोकगीत और कृषि परंपराएं तथा दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की समृद्ध आदिवासी संस्कृति पूरे प्रदेश को विशिष्ट बनाती है।

विशेष रूप से बस्तर की धरती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यहां के माड़िया, मुरिया, गोंड, हल्बा, भतरा, अबूझमाड़िया सहित विभिन्न जनजातीय समुदायों के लोक संस्कार, परंपराएं और जीवनशैली हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं, बस्तर दशहरा, जो अपनी अनूठी परंपरा और लंबे आयोजन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था और जनजातीय संस्कृति का अद्भुत उदाहरण है,यहां का गोंचा पर्व, मड़ई मेले, लोकनृत्य, मांदरी नृत्य, गौर नृत्य, ढोल-मांदर की थाप और पारंपरिक रीति-रिवाज छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को और समृद्ध करते हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर के जंगल, पहाड़, जलप्रपात, नदियां और वन्यजीव केवल पर्यटन के केंद्र नहीं, बल्कि वहां के आदिवासी समाज की जीवनशैली और आजीविका का अभिन्न हिस्सा हैं, इसी तरह कोरबा, जशपुर, रायगढ़, सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर से लेकर प्रदेश के मैदानी और अन्य वनांचल क्षेत्रों तक प्रकृति और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

जितेंद्र सारथी ने कहा कि राज्य के सभी 33 जिले अपनी अलग पहचान और विशेषताओं के साथ छत्तीसगढ़ की प्रगति में योगदान दे रहे हैं। हमें विकास के साथ-साथ अपनी भाषा, बोली, लोककला, जनजातीय परंपराओं, जल, जंगल और जमीन का संरक्षण भी सुनिश्चित करना होगा।

उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे अपनी संस्कृति और परंपराओं को केवल त्योहारों तक सीमित न रखें, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक इनका महत्व पहुंचाएं। वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, क्योंकि प्रकृति सुरक्षित रहेगी तभी हमारी सांस्कृतिक विरासत और आने वाला भविष्य सुरक्षित रहेगा।

अंत में उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की असली ताकत इसकी विविधता में एकता, लोक संस्कारों में अपनापन और प्रकृति के प्रति सम्मान है। आइए, हम सब मिलकर एक विकसित, समृद्ध, खुशहाल और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लें।

जय जोहार! जय छत्तीसगढ़ महतारी!

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