Monday 28th of September 2026

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कोरबा : लाठी-डंडा खाएंगे...चाहे जेल जाएंगे, नहीं होने देंगे जनसुनवाई। पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने कहा, मानिकपुर विस्तार से

कोरबा (दैनिक न्यूज उड़ान) पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने कहा कि साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (एसईसीएल) की मानिकपुर विस्तार परियोजना की पर्यावरणीय जनसुनवाई को लेकर प्रभावित आठ गांवों के ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस जमीन के सहारे उनके परिवारों ने पीढ़ियों तक जीवन गुजारा, उसका अर्जन 1964 में कर लिया गया था।

छह दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कई प्रभावित परिवार पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार के अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

ऐसे में पुराने मामलों का निराकरण किए बिना खदान विस्तार की जनसुनवाई कराना उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।

ग्रामीणों ने मंगलवार को पूर्व राजस्व मंत्री अग्रवाल से मुलाकात कर अपनी पीड़ा बताई। ग्रामीणों ने कहा कि 62 साल पहले जमीन का अर्जन बेहद कम मुआवजे में कर लिया गया था।

इसके बाद प्रभावित परिवारों की दो पीढ़ियां अभाव और अनिश्चितता के बीच जीवन बिताने को मजबूर रहीं। कई ग्रामीणों की जमीन पर खदान शुरू हो चुकी है, जबकि कुछ परिवारों की जमीन का हिस्सा आज भी उनके कब्जे में है।

अब उस शेष भूमि को भी महज साढ़े छह लाख रुपये देकर लेने की प्रक्रिया पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि उनके लिए यह केवल जमीन का मामला नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है। जमीन चली गई तो खेती का सहारा खत्म हुआ, लेकिन उसके बदले स्थायी पुनर्वास, रोजगार और जीवनयापन का मजबूत आधार नहीं मिल सका।

यही वजह है कि आज भी कई परिवार अपने अधिकारों के लिए भटक रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुराने प्रभावितों के पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार के मामलों का समाधान होने तक वे पर्यावरणीय जनसुनवाई नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वे लाठी-डंडे खाएंगे और जेल भी जाएंगे। हर स्तर पर विरोध करेंगे।

पूर्व मंत्री ने सीएमडी को लिखा पत्र, कहा, पहले समस्याओं का समाधान करें

पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल ने ग्रामीणों की बात सुनने के बाद एसईसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक हरीश दुहन को पत्र भेजकर पर्यावरणीय जनसुनवाई तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि पहले प्रभावित परिवारों के साथ वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान किया जाए। पुराने लंबित पुनर्वास, मुआवजा, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों का निराकरण करने के बाद ही मानिकपुर खदान विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए।

श्री अग्रवाल ने कहा कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत प्रभावित परिवारों के साथ अन्याय करके नहीं चुकाई जा सकती।

आठों गांवों के पुराने और नए प्रभावितों की बैठक बुलाकर उनकी समस्याएं सुनी जानी चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसके पहले जनसुनवाई कराई जाती है तो ग्रामीणों की ओर से इसका और अधिक जोरदार विरोध किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।

ग्रामीणों का दर्द छह दशक पुराना

प्रभावित परिवारों के लिए मानिकपुर विस्तार का मुद्दा केवल खदान का विस्तार नहीं है।

यह उन परिवारों की कहानी है, जिनकी जमीन दशकों पहले चली गई, लेकिन विस्थापन का दर्द आज भी खत्म नहीं हुआ।

ग्रामीणों की मांग है कि नई परियोजना शुरू करने से पहले पुराने घाव भरे जाएं और जिन परिवारों ने अपनी जमीन दी है, उन्हें सम्मान के साथ उनका हक मिले।

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