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रायपुर : विश्व आदिवासी दिवस पर रायपुर में भव्य आयोजन, रमेश यदु ने मुख्यमंत्री के समक्ष उठाई जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा की मांग।

रायपुर( दैनिक न्यूज उड़ान) विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में आदिवासी समाज द्वारा भव्य कार्यक्रम एवं विशाल रैली का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने सहभागिता की। इस दौरान आदिवासी संस्कृति, परंपरा, अधिकारों एवं सामाजिक एकता का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम के अवसर पर छत्तीसगढ़िया सर्व समाज महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष माननीय श्री रमेश यदु जी एवं मगधा यादव समाज के रायपुर जिला अध्यक्ष गजानंद यादव का आदिवासी समाज द्वारा सम्मान किया गया। इस दौरान सामाजिक एवं आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने उनका स्वागत कर सम्मान व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया जल-जंगल-जमीन का मुद्दा

विशाल रैली में सहभागिता करते हुए श्री रमेश यदु जी ने जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री के समक्ष आदिवासी समाज के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा जल-जंगल-जमीन को सुरक्षित रखने की मांग रखी।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति और जीवन प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के साथ-साथ आदिवासी समाज के अधिकारों और हितों की सुरक्षा भी आवश्यक है।

जल-जंगल-जमीन आदिवासी समाज की पहचान

श्री रमेश यदु जी ने कहा कि “जल, जंगल और जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, बल्कि आदिवासी समाज के जीवन, संस्कृति और पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं।” उन्होंने कहा कि इनके संरक्षण के साथ आदिवासी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि समाज के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।

प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

रैली में दिखी आदिवासी संस्कृति की झलक

कार्यक्रम के दौरान विशाल रैली निकाली गई, जिसमें पारंपरिक वेशभूषा, विभिन्न झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। रैली में बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने शामिल होकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया।

कार्यक्रम में सामाजिक एकता, संस्कृति के संरक्षण और समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया गया।

विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित यह भव्य कार्यक्रम सामाजिक एकता, आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के संकल्प का प्रभावशाली संदेश बनकर सामने आया।

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